गिरिडीह। रोजी-रोटी कमाने और परिवार का भविष्य बेहतर बनाने की उम्मीद लेकर करीब एक महीने पहले छत्तीसगढ़ गए बगोदर के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम पसर गया।
मामला बगोदर थाना क्षेत्र की कुसमरजा पंचायत के खटैया गांव का है। गांव निवासी केशव महतो का पुत्र वीरेंद्र महतो रामचंद्रा कंपनी में मजदूरी करने के लिए करीब एक महीने पहले छत्तीसगढ़ गया था। बताया जा रहा है कि वहां उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
वीरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार को उम्मीद थी कि वीरेंद्र बाहर जाकर मेहनत-मजदूरी करेगा और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ परिवार का भविष्य बेहतर बनाएगा। लेकिन अचानक उसकी मौत की खबर ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।
मौत की वजह अब तक स्पष्ट नहीं
वीरेंद्र की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। परिजनों के अनुसार, कंपनी की ओर से तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी गई है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह क्या है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजन घटना की पूरी जानकारी मिलने और वीरेंद्र के शव के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
पत्नी और सात वर्षीय बेटे के सामने बढ़ी मुश्किल
वीरेंद्र अपने पीछे पत्नी नीता देवी और सात वर्षीय इकलौते बेटे निखिल कुमार को छोड़ गया है। परिवार के लिए वीरेंद्र ही आर्थिक सहारा था। उसकी असमय मौत के बाद पत्नी और मासूम बेटे के सामने भविष्य को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
जिस बेटे को वीरेंद्र बेहतर जिंदगी देने के लिए परदेस गया था, अब वही बेटा अपने पिता के घर लौटने का इंतजार कर रहा है। लेकिन वीरेंद्र अब जीवित नहीं, बल्कि शव के रूप में अपने गांव लौटेगा।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर फिर सवाल
वीरेंद्र की मौत ने एक बार फिर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंता को सामने ला दिया है। ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मजदूर रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में किसी मजदूर की मौत होने पर परिवार तक सही जानकारी पहुंचाने और शव को घर तक लाने की प्रक्रिया भी चुनौती बन जाती है।
परिजनों से मिले सिकंदर अली और बरसात अंसारी
वीरेंद्र की मौत की जानकारी मिलने के बाद प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली और पंचायत समिति सदस्य बरसात अंसारी उसके घर पहुंचे। दोनों ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
सिकंदर अली ने प्रशासन से मांग की कि वीरेंद्र के शव को जल्द से जल्द गांव लाने की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को नियमानुसार सरकारी सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
बरसात अंसारी ने कहा कि वीरेंद्र की असमय मौत से पूरा गांव दुखी है। प्रशासन को तत्काल पहल करते हुए शव को गांव लाने और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
फिलहाल खटैया गांव में वीरेंद्र के शव के लौटने का इंतजार है। करीब एक महीने पहले जिस युवक को परिवार ने रोजी-रोटी और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ छत्तीसगढ़ भेजा था, अब उसी परिवार को उसकी अंतिम विदाई की तैयारी करनी पड़ रही है।





