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फिर एक प्रवासी मजदूर की हुई मौत, सप्ताह भर में यह दूसरी घटना

शव पहुंचते ही परिजनों के चीत्कार से माहौल हुआ गमगीन तिसरी : प्रखंड के रहने वाले एक और प्रवासी मजदूर की शुक्रवार को मौत हो गई है. मृतक मजदूर तिसरी पंचायत के कौसिलवा निवासी तालो हेम्ब्रम का 35 वर्षीय पुत्र मुकेश हेम्ब्रम था. परिजन बताते हैं कि मुकेश 5 महीने पहले काम करने आंध्रप्रदेश स्थित

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By Manish Singh May 26, 2024 May 26 64 Views
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शव पहुंचते ही परिजनों के चीत्कार से माहौल हुआ गमगीन

तिसरी : प्रखंड के रहने वाले एक और प्रवासी मजदूर की शुक्रवार को मौत हो गई है. मृतक मजदूर तिसरी पंचायत के कौसिलवा निवासी तालो हेम्ब्रम का 35 वर्षीय पुत्र मुकेश हेम्ब्रम था. परिजन बताते हैं कि मुकेश 5 महीने पहले काम करने आंध्रप्रदेश स्थित विशाखापट्टनम गया हुआ था. वहां वो किसी कम्पनी में टर्नल बनाने का काम करता था. बताया जाता है कि टर्नल बनाने के दौरान एक पत्थर के गिरने से मुकेश व एक अन्य व्यक्ति बुरी तरह घायल हो गया. घटना के बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान मुकेश ने दम तोड़ दिया. मुकेश के मौत की खबर मिलते ही पुरे गांव में मातम पसर गया. इस संबंध में मृतक के चचेरे भाई निर्मल हेम्ब्रम ने बताया कि मामले में एफआईआर हुआ है. कम्पनी द्वारा उसके शव को घर भेज दिया गया.

भाई भी दिल्ली में रहकर करता है मजदूरी

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शनिवार की देर शाम मृतक का शव उसके गांव पहुंचा. शव को देखते ही परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे. जिसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया. घटना की सूचना पर स्थानीय मुखिया किशोरी साव भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार को हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया. जानकारी के अनुसार मृतक मुकेश हेम्ब्रम का भाई सुरेश हेम्ब्रम भी एक प्रवासी मजदूर है. वह दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है. मुकेश अपने पीछे पत्नी बसंती देवी समेत दो पुत्रीयों को भी छोड़ गया.

मजबूरी में करते हैं बड़े शहर का पलायन

बता दें कि बीते एक सप्ताह के भीतर ही तिसरी प्रखंड के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है. इससे पूर्व 17 मई शुक्रवार को प्रखंड के खटपोंक पंचायत के दीवाजोत के 23 वर्षीय उपेंद्र राय की मौत काम के लिए मंगलौर जाने के दौरान रास्ते में ही हो गई थी. गौरतलब है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का कोई साधन उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्र से भारी संख्या में मजदूर बड़े शहरों की ओर पलायन करते हैं. अपने परिवार का पेट भरने के लिए दूसरे राज्यों का रूख करने वाले इन मजदूरों की मजबूरी का महज अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

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