गिरिडीह : उपायुक्त के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया और WhatsApp अकाउंट बनाए जाने का मामला सामने आया है। ऐसे में अगर आपके पास गिरिडीह DC के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है या WhatsApp पर कोई मैसेज पहुंचता है, तो बिना सत्यापन के भरोसा न करें।
DC के नाम और फोटो का किया गया दुरुपयोग
उपायुक्त रामनिवास यादव के नाम एवं फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाया गया है। इसके जरिए लोगों से संपर्क कर आर्थिक मदद के नाम पर राशि की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध भुगतान संबंधी साक्ष्यों के अनुसार, खुशी रानी शर्मा से ₹20 हजार की साइबर ठगी हुई है।
साइबर थाना में दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के आधार पर फर्जी अकाउंट संचालित करने वाले व्यक्ति की पहचान की जा रही है।
फ्रेंड रिक्वेस्ट या WhatsApp मैसेज आए तो क्या करें?
अगर उपायुक्त के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है या WhatsApp पर कोई संदेश भेजकर पैसे की मांग की जाती है, तो तत्काल सावधान हो जाएं।
फर्जी अकाउंट, संदिग्ध नंबर या आर्थिक मदद से जुड़े संदेश को आगे शेयर करने के बजाय उसकी सूचना पुलिस या साइबर थाना को दें।
प्रशासन ने आमजनों को किया अलर्ट
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों के साथ सभी पदाधिकारियों और कर्मियों से सोशल मीडिया एवं मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। किसी अधिकारी के नाम, फोटो या पदनाम से आने वाले संदेश को बिना सत्यापन के वास्तविक न मानने की सलाह दी गई है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क
अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
जिला प्रशासन की सख्त चेतावनी
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी अधिकारी के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाना और उसके माध्यम से लोगों से धनराशि मांगना गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।





