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चरम पर है बैरल पत्थर का अवैध उत्खनन, तिसरी प्रखंड के असुरहड्डी में हो रहा है खनन

कोडरमा से लेकर जयपुर की मंडियों तक जुड़े हैं तार तिसरी : प्रखंड अंतर्गत लोकाय नयनपुर थाना क्षेत्र के असुरहड्डी इलाके में इन दिनों बेशकीमती पत्थरों का अवैध उत्खनन चरम पर है। स्थानीय बोलचाल की भाषा में इसे बैरल पत्थर कहा जाता है। अवैध कारोबारियों को पुलिस प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों का कोई

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By Tisri Block May 28, 2022 May 28 55 Views
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कोडरमा से लेकर जयपुर की मंडियों तक जुड़े हैं तार

तिसरी : प्रखंड अंतर्गत लोकाय नयनपुर थाना क्षेत्र के असुरहड्डी इलाके में इन दिनों बेशकीमती पत्थरों का अवैध उत्खनन चरम पर है। स्थानीय बोलचाल की भाषा में इसे बैरल पत्थर कहा जाता है। अवैध कारोबारियों को पुलिस प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों का कोई खौफ नहीं दिखता। दिन के उजाले में बेरोकटोक इस अवैध धंधे को अंजाम दिया जा रहा है। दर्जनों मजदूर इस कार्य में लगे हुए देखे जा सकते हैं।

प्रत्येक माह करोड़ों रुपए के अवैध कारोबार की चर्चा

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बताया जाता है कि यह पत्थर काफी कीमती होता है। इसकी कीमत 25 रुपए से लेकर 1 लाख रुपए प्रति किलो बताई जाती है। प्रत्येक माह इस धंधे से करोड़ों रुपए के अवैध कारोबार किए जाने की चर्चा है। यह कारोबार पिछले कई वर्षों से इस इलाके में जारी है। बताया जाता है कि वन विभाग ने कई बार इस पर कार्रवाई की परंतु गुजरते समय के साथ अवैध उत्खनन करने वाले माफिया पुन: कानून को ठेंगा दिखाकर इस धंधे को अंजाम देने में लग जाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व इस इलाके में संचालित दर्जनों खदानों को वन विभाग ने ध्वस्त भी किया था। आज फिर से खनन जारी है।

एसडीपीओ और एसडीओ के निर्देश को ठेंगा दिखाकर बेरोक टोक जारी है खनन

गौरतलब है कि बीते फरवरी माह में इस स्थान की छापामारी के दौरान एसडीपीओ मुकेश कुमार महतो और एसडीओ धीरेंद्र कुमार सिंह ने वन विभाग को अवैध उत्खनन के लिए बनाए गए सभी मुहानों की डोजरिंग करने का निर्देश दिया था। विभाग ने दिखावे के लिए कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती करने का काम किया। कार्रवाई किस प्रकार की गई आप इस बात से समझ सकते हैं कि उस वक्त फरवरी माह में जहां खनन के लिए माफियाओं द्वारा 6-7 सुरंग थे , आज उस सुरंग के मुहानों की संख्या 25 से लेकर 30 तक हो गई है। कहा जा सकता है कि एसडीपीओ और एसडीओ के निर्देश को ठेंगा दिखलाया जा रहा है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस धंधे का तार कोडरमा से जुड़ा हुआ है। इस पत्थर को कोडरमा के रास्ते जयपुर की मंडियों में खपाए जाने की चर्चा आम है। जयपुर और राजस्थान में इसकी काफी डिमांड है। चर्चा तो यह भी है कि जयपुर के बाद विदेशों तक भी इसे भेजा जाता है। इस धंधे को जिस प्रकार बेरोकटोक संचालित किया जा रहा है उससे अधिकारियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं है तो कोई कोडरमा से आकर धड़ल्ले से दिन के उजाले में अवैध कारोबार को अंजाम देता हो और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो यह कैसे मुमकिन है। बहरहाल जो भी हो इस इलाके में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बदस्तूर जारी है। इस ओर ध्यान देकर इसे बचाने की दरकार है।
तिसरी प्रखंड से चंदन भारती की रिपोर्ट।

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