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इसरो के रिसर्च प्रोजेक्ट में ई-रिक्शा चालक के पुत्र का चयन

बिहार : बिहार बाल भवन किलकारी के छात्र हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। एक बार फिर किलकारी के लाल ने कमाल कर दिखाया है। बिहार बाल भवन किलकारी के विज्ञान विद्या के छात्र हर्ष राजपूत का चयन इसरो के भारत के पहले आरएलवी (री-यूजेबल लांच व्हीकल) राकेट “अटल यान” परियोजना

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By Manish Singh Aug 19, 2022 Aug 19 50 Views
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बिहार : बिहार बाल भवन किलकारी के छात्र हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। एक बार फिर किलकारी के लाल ने कमाल कर दिखाया है। बिहार बाल भवन किलकारी के विज्ञान विद्या के छात्र हर्ष राजपूत का चयन इसरो के भारत के पहले आरएलवी (री-यूजेबल लांच व्हीकल) राकेट “अटल यान” परियोजना के लिए किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पूरे भारत से साढ़े तीन हजार शोधकर्ताओं का चयन किया गया है। हर्ष की उम्र महज 16 वर्ष है। 11वीं कक्षा के विज्ञान के छात्र हैं। शोधकर्ताओं में हर्ष सबसे कम उम्र के हैं। डीआरडीओ और इसरो ने अटल यान आर्बिटएक्स इंडिया एरोस्पेस कंपनी को राकेट बनाने का काम दिया है। बिहार बाल भवन किलकारी राज्य सरकार द्वारा संचालित है। यहां साधनविहीन वैसे छात्रों को अवसर प्रदान किया जाता है, जो नवाचार में रुचि रखते हैं।

अटल यान एक पुन: प्रयोज्य दो चरणों वाला राकेट बनेगा। इसे आर्बिटएक्स द्वारा डिजाइन और निर्मित किया जाना है। यह कंपनी इसरो और डीआरडीओ से जुड़ी है। हर्ष को अटल यान के एयर ब्रिदिंग सिस्टम रिसर्च बोर्ड में काम करने का मौका मिलेगा। हर्ष ने बताया कि यह वायु श्वास प्रणाली है। एक वायु-श्वास राकेट इंजन लगभग आधी उड़ान के लिए हवा से आक्सीजन लेता है। अटल यान परियोजना छह बोर्डों में विभाजित है। प्रत्येक बोर्ड के लिए, एक मेंटर शोधकर्ता और एक सहायक निदेशक रखे गए हैं, जो शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे।

हर्ष राजपूत अटल यान के एयर ब्रिदिंग सिस्टम रिसर्च बोर्ड में तीन महीने की इंटर्नशिप कर चुके हैं। इन्हें आर्बिटएक्स से इंटर्नशिप का प्रमाणपत्र और शोधकर्ता का प्रमाणपत्र भी मिला है। उसी दौरान इनकी प्रतिभा को इसरो के विज्ञानियों ने पहचाना।

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हर्ष ने कोरोना काल में बुजुर्गों को ध्यान में रखते हुए ऐसा मास्क तैयार किया था, जिससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ नहीं हो। इसे एंटी सफोकेशन मास्क नाम दिया था। फैन माड्यूल वाला यह मास्क नमी, तापमान और सीओ टू के स्तर को कम करता है। यह हानिकारक वायुजनित प्रदूषकों से सुरक्षित हवा प्रदान करता है। प्रति मिनट 240 लीटर तक स्वच्छ हवा प्रदान कर सकता है, जो व्यस्क व्यक्ति के लिए पर्याप्त है। इसकी कीमत छह सौ से सात सौ भारतीय रुपये तक है। इस नवाचार के जरिए हर्ष बिहार बाल भवन के संचालक के जरिए शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों की नजर में आए और इन्हें इसरो में इंटर्नशिप के लिए भेजा गया।

हर्ष बताते हैं कि उनके पिता शंभु सिंह ई-रिक्शा चलाते हैं। पिता ही घर का सारा खर्च उठाते हैं। हर्ष की एक छोटी बहन है, जो आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है। हर्ष की मां गृहिणी हैं।

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