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आज गिरिडीह का 49 वां स्थापना दिवस, जाने गिरिडीह का इतिहास और वर्तमान

गिरिडीह : जिला 1972 में हजारीबाग से अलग होकर जिला बना था। यह जिला अभ्रक, कोयला, बांस, कटहल और पलास के लिए प्रसिद्ध है। झारखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी पारसनाथ, इसी जिला में अवस्थित है। जो जैनियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल भी है। झारखंड धाम, हरिहर धाम, दुखहरण धाम, खंडोली डैम, सूर्य मंदिर, कबीर ज्ञान


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गिरिडीह : जिला 1972 में हजारीबाग से अलग होकर जिला बना था। यह जिला अभ्रक, कोयला, बांस, कटहल और पलास के लिए प्रसिद्ध है। झारखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी पारसनाथ, इसी जिला में अवस्थित है। जो जैनियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल भी है। झारखंड धाम, हरिहर धाम, दुखहरण धाम, खंडोली डैम, सूर्य मंदिर, कबीर ज्ञान मंदिर, साई मंदिर, उसरी जलप्रपात जैसे पर्यटक स्थल गिरिडीह जिले में ही स्थित है। गिरिडीह विश्व प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस की कर्मभूमि भी रही है।

स्थापना
गिरिडीह जिले का मुख्यालय गिरिडीह के रूप में शहर है। गिरिडीह जिला 4 दिसंबर 1972 को हजारीबाग से अलग होकर बना था।

स्थिति और विस्तार

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यह जिला उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के मध्य में स्थित है। इसके उत्तर में बिहार के जमुई और नवादा जिले हैं। पूर्व में देवघर और जामताड़ा जिला स्थित है। जबकि पश्चिम में हजारीबाग और कोडरमा जिला से यह सटा हुआ है। वहीं दक्षिण में धनबाद और बोकारो जिला स्थित है। शेरशाह सूरी मार्ग (NH-2) इस जिले से होकर गुजरती है। यह जिला 24°11′ उत्तरी अक्षांश से 24°18′ उत्तरी अक्षांश तक तथा 86°11′ पूर्वी देशांतर से 86°30′ पूर्वी देशांतर तक विस्तृत है। गिरिडीह का क्षेत्रफल 4854 वर्ग किलोमीटर (1874 वर्ग मील) है।

गिरिडीह का अर्थ
गिरि का अर्थ पहाड़ और डीह का अर्थ भूमि अथवा क्षेत्र से है। इस प्रकार गिरिडीह का अर्थ “पहाड़ों की भूमि” हुआ। पूरे गिरिडीह जिले में सैकड़ों पहाड़ है और अधिकतर पहाड़ डुमरी और पीरटांड़ के क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है।

भौगोलिक परिदृश्य

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भौगोलिक दृष्टिकोण से गिरिडीह जिला जंगल झाड़ और पहाड़ों के बीच में बसा हुआ है। यह क्षेत्र उत्तरी छोटानागपुर पठार के अंतर्गत शामिल किया जाता है। यहां पहाड़ ही पहाड़ दिखाई पड़ते हैं। यहां स्थित पठारी भूभाग की औसत ऊंचाई समुद्र तल से 500 मीटर से भी अधिक है।

नदियां

यहां दामोदर की बड़ी सहायक नदी बराकर बहती है। और बराकर की सहायक नदी उसरी नदी के किनारे गिरिडीह शहर बसा हुआ है। इसी नदी पर उसरी नामक आकर्षक जलप्रपात है। जिसे देखने के लिए हजारों पर्यटक प्रतिवर्ष पहुंचते हैं।

वनस्पति

गिरीडीह जिला बांस, कटहल और पलाश के लिए जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यहां सखुआ (साल), महुआ, आम, कुसुम, सेमल, केंन्दु, आसन, पियार, अकेसिया, यूकेलिप्टस, शीशम, भेलवा आदि विभिन्न प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं।

पलाश

यहां बसंत ऋतु में पलाश के फूल से पूरे वन क्षेत्र महकने लगता है। जो पर्यटकों को बरबस ही अपनी और आकर्षित करता है पूरा जंगल पलाश के फूलों से ढक जाता है।

बांस

गिरिडीह पलाश के अतिरिक्त बांस के लिए भी जाना जाता है। बांस एक महत्वपूर्ण वनस्पति है जिसका इस्तेमाल घर बनाने, चटाई, टोकरी, सूप कई प्रकार के आवश्यक कार्यों में किया जाता है। बांस यहां बहुतायत में पाया जाता है। बांस के कोपले जिसे यहां करील के नाम से लोग जानते है


बांस का करील
इस करील का इस्तेमाल सब्जी, भुंजिया, अचार, मुरब्बा तथा दवा के रूप में प्रयोग में लाई जाती है।

कटहल
गिरिडीह जिला पृथ्वी के सबसे बड़े फल कटहल के लिए प्रसिद्ध है। यहां कटहल के पौधों को लगाया जाता है। कटहल को सब्जी और अचार आदि रूपों में प्रयोग में लाया जाता है।

खनिज संसाधन
गिरिडीह अभ्रक और कोयले के लिए प्रसिद्ध है। यहां अभ्रक को चुना जाता है तथा इसे साफ कर बाहर भेजा जाता है। गिरिडीह में सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड (CCL) की खानें हैं।

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