AD
Advertise With Us
Reach your target audience with premium placements
AD
Advertise With Us
Promote your brand to thousands of daily visitors
300x250 Learn More

छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना, दिनभर निर्जला व्रत के बाद ग्रहण करेंगी प्रसाद, जानें खरना के नियम

हिंदू धर्म में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ छठ पर्व आरंभ हो जाता है, जो सप्तमी तिथि को सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है। आस्था का महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना किया जाता है। इस दिन का काफी अधिक


AD
Advertise With Us
Reach your target audience with premium placements
AD
Advertise With Us
Promote your brand to thousands of daily visitors
300x250 Learn More

हिंदू धर्म में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ छठ पर्व आरंभ हो जाता है, जो सप्तमी तिथि को सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है। आस्था का महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना किया जाता है। इस दिन का काफी अधिक महत्व होता है, क्योंकि इस दिन विशेष प्रकार का प्रसाद बनाया जाता है। आइए जानते हैं खरना का महत्व और नियम…

छठ खरना 2024 तिथि
छठ महापर्व का दूसरा दिन यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना होता है। बता दें कि आज 6 नवंबर को खरना पड़ रहा है।

क्या है खरना?
इस दिन व्रत निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को स्नान करने के बाब छठी मईया की विधिवत पूजा करती है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करने के बाद करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है। इस दिन गुड़, खीर और रोटी का भोग लगाया जाता है। इस दिन आरंभ हुई व्रत सप्तमी तिथि के अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है।

AD
Advertise With Us
Reach your target audience with premium placements
AD
Advertise With Us
Promote your brand to thousands of daily visitors
300x250 Learn More

खरना के नियम
छठ के काफी कठोर नियम माने जाते हैं। इस दिन नए मिट्टी के चूल्हे में पीतल के बर्तन में गुड़ की खीर बनाई जाती है। खीर के अलावा इस दिन ठेकुआ भी बनाए जाते हैं।
खरना में प्रसाद सिर्फ व्रती ही बनाती हैं। इसे बाद में व्रती प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के साथ दूसरों को बांटा जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
खरना का प्रसाद बनाते समय शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है।
प्रसाद बनाते समय न उसे जूठा किया जाता है और न ही इसे गंदे हाथों से छुआ जाता है। बनाते समय पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
छठी माई को चढ़ाई जाने वाली हर एक चीज अखंडित होती है। फिर चाहे वो फूल और फल ही क्यों न हो, जिसे पक्षी ने खाकर जूठा किया हो।
पूजा के दौरान नए वस्त्र धारण किया जाता है। इसके साथ ही साड़ी भी खंडित न हो। इस कारण सुई वगैरह से फॉल आदि नहीं लगाए जाते हैं।
व्रती महिलाओं को बिस्तर आदि में सोने की मनाही होती है। जमीन में चटाई बिछाकर सोना होता है।

AD
Advertise With Us
Reach your target audience with premium placements
AD
Advertise With Us
Promote your brand to thousands of daily visitors
300x250 Learn More

रोजाना नई नई खबर पढ़ने के लिए हमारे Whatsapp Channel को ज्वाइन करें। हम केवल सुबह और शाम को खबरे ग्रुप में डालते है। हमारा वादा है की आप इस ग्रुप से जुड़ कर निराश नहीं होंगे। हमारे Whatsapp Channel से जुड़ने क लिए धन्यवाद।

Join Now

Related Stories