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स्वामी विवेकानंद रेज़िडेंशियल स्कूल से 5 बच्चे गायब, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के पंदनाटांड स्थित स्वामी विवेकानंद रेज़िडेंशियल स्कूल से शुक्रवार की रात पाँच बच्चे अचानक गायब हो गए। यह घटना आधी रात करीब 12 बजे की बताई जा रही है, जब छात्र हॉस्टल की दीवार फांदकर भाग निकले। सुबह इसकी जानकारी मिलते ही विद्यालय प्रबंधन के हाथ-पाँव फूल गए और परिजनों


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गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के पंदनाटांड स्थित स्वामी विवेकानंद रेज़िडेंशियल स्कूल से शुक्रवार की रात पाँच बच्चे अचानक गायब हो गए। यह घटना आधी रात करीब 12 बजे की बताई जा रही है, जब छात्र हॉस्टल की दीवार फांदकर भाग निकले। सुबह इसकी जानकारी मिलते ही विद्यालय प्रबंधन के हाथ-पाँव फूल गए और परिजनों को बुलाकर खोजबीन शुरू की गई। अंततः सुबह करीब 9 बजे सभी बच्चे लोकाय क्षेत्र में मिले।

गायब होने वाले छात्रों में कक्षा 6 का शिव शक्ति कुमार, कक्षा 3 का दीपक कुमार, कक्षा 9 के हरेंद्र कुमार और चंदन कुमार, तथा कक्षा 8 का सूरज कुमार शामिल हैं। इनमें से तीन छात्र हॉस्टल में रहते थे। सवाल यह उठता है कि जब हॉस्टल में 75 बच्चों के रहने का दावा किया जाता है तो फिर पाँच बच्चों के दीवार फांदकर भाग जाने की खबर रातभर किसी को क्यों नहीं लगी? यह सीधी-सीधी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता है।

इस घटना ने न केवल स्कूल प्रबंधन की पोल खोली है बल्कि जिले में संचालित हो रहे निजी आवासीय विद्यालयों के संचालन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वामी विवेकानंद रेज़िडेंशियल स्कूल की स्थिति खुद बयां करती है कि बच्चों का भविष्य किस तरह दांव पर लगाया जा रहा है। यहाँ क्लासरूम को ही हॉस्टल बना दिया गया है। दिन में बच्चे चौकी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं और रात में उसी चौकी पर बिस्तर लगाकर सो जाते हैं। न खेल मैदान की व्यवस्था है और न ही शौचालय की सही सुविधा। क्या यही है आवासीय विद्यालय की परिभाषा?

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सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग पर है। आखिर ऐसे विद्यालयों को यू-डाइस कोड और मान्यता किस आधार पर दे दी जाती है? सूत्रों के मुताबिक, मानकों को ताक पर रखकर “सेटिंग-गेटिंग” के जरिए कई निजी विद्यालय चल रहे हैं। विभाग की चुप्पी और उदासीनता ही बच्चों की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है।

 

तिसरी से चंदन की रिपोर्ट 

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