
यदि इस बजट को *निवेशक* की दृष्टि से देखा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह किसी *तात्कालिक सुर्ख़ी* बनाने वाला बजट नहीं है, *बल्कि लॉन्ग टर्म* सोच और *आर्थिक अनुशासन* के साथ तैयार किया गया बजट है। इसमें *शॉर्ट टर्म* में बाज़ार को उत्साहित करने वाली घोषणाएँ सीमित हैं, लेकिन *देश की अर्थव्यवस्था* को स्थिर बनाए रखने और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का *स्पष्ट संकेत* मिलता है।
पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि कैसे *शॉर्ट टर्म* राहत या *लोक-लुभावन घोषणाएँ* तत्काल प्रतिक्रिया तो पैदा करती हैं, लेकिन वे *अर्थव्यवस्था और बाज़ार* की बुनियाद को मज़बूत नहीं कर पातीं। इस बजट में सरकार ने यह साफ़ संदेश दिया है कि वह *शॉर्ट टर्म* फायदे और *केवल मतदाताओं* को आकर्षित करने वाली घोषणाओं के बजाय *पूंजीगत व्यय, राजकोषीय अनुशासन और मज़बूत संरचनात्मक* सुधारों पर अधिक ध्यान देना चाहती है।
इसी सोच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण *F&O Trading* पर प्रतिभूति लेन-देन कर *(STT)* में वृद्धि है। यह कदम पहली नज़र में बाज़ार के एक वर्ग को असहज लग सकता है, लेकिन यदि आँकड़ों के आधार पर देखा जाए तो इसका तर्क बिल्कुल स्पष्ट है। उपलब्ध डेटा यह दर्शाता है कि *10 में से 9* रिटेल निवेशक *F&O Trading* में नुकसान उठा रहे हैं। ऐसे में *अत्यधिक सट्टेबाज़ी* और बिना समझे किए जा रहे *शॉर्ट टर्म ट्रेड्स* को नियंत्रित करना न केवल ज़रूरी है, बल्कि निवेशकों के हित में भी है।

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*F&O Trading* में बढ़ती भागीदारी ने बाज़ार को निवेश से ज़्यादा जुए की ओर मोड़ने का जोखिम पैदा कर दिया था। जब ट्रेडिंग का उद्देश्य तेज़ मुनाफ़ा बन जाता है और जोखिम प्रबंधन पीछे छूट जाता है, तो उसका परिणाम अंततः निवेशकों के नुकसान के रूप में सामने आता है। *STT* में वृद्धि के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह बाज़ार को *अनुशासित, स्थिर और स्वस्थ* दिशा में ले जाना चाहती है।
*लॉन्ग टर्म* में इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। जब शॉर्ट टर्म *सट्टेबाज़ी और ओवर-ट्रेडिंग* कम होगी, तब बाज़ार का झुकाव स्वाभाविक रूप से *निवेश* की ओर बढ़ेगा। इससे न केवल वोलैटिलिटी कम होगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मज़बूत होगा।
*शशांक अग्रवाल* एक म्यूचुअल फंड वितरक (एमएफ़डी) हैं, जो पिछले 12 वर्षों से *वेल्थ मैनेजमेंट उद्योग* में सक्रिय हैं और निवेशक व्यवहार तथा बाज़ार संरचना की गहरी समझ रखते हैं। उनका मानना है कि यह बजट और विशेष रूप से *F&O Trading* से जुड़ा यह कदम, निवेशकों को शॉर्ट टर्म *Speculation* से बाहर निकालकर लॉन्ग टर्म *Wealth Creation* की ओर प्रेरित करेगा। यही वह मार्ग है जो न केवल *निवेशकों* के लिए, बल्कि पूरे *पूंजी बाज़ार और अर्थव्यवस्था* के लिए भी सबसे स्वस्थ और टिकाऊ साबित हो सकता है।


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